थप्पड़ कांड में जेल गए Naresh Meena समर्थकों का आंदोलन जारी

जनता के नेता नरेश मीणा: न्याय के लिए संघर्ष कर रहे निर्दलीय प्रत्याशी Naresh Meena के पक्ष में जन सैलाब

"Naresh Meena Arrested for Slapping SDM: High Tension in Tonk Village"

Rajasthan के देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के दौरान हुए चर्चित 'थप्पड़ कांड' के मुख्य आरोपी Naresh Meena 26 दिनों से जेल में हैं। न्यायालय से लगातार झटके मिलने के बाद उनके समर्थकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब Naresh Meena के समर्थकों ने साफ तौर पर घोषणा की है कि अगर 15 दिसंबर तक रिहाई नहीं हुई, तो 17 दिसंबर से प्रदेशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा।

मीणा के पक्ष में स्थानीय युवा और ग्रामीण बड़ी संख्या में जुट रहे हैं। जो सिर्फ मीणा समाज के नहीं बल्कि सर्व समाज के लोग हैं उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है और निर्दलीय नेता को झूठे मुकदमों में फंसाया गया है। समर्थक इसे न्याय की लड़ाई बताते हुए राज्य सरकार और प्रशासन पर आर पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं 

ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आगामी दिनों में यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा या फिर शासन प्रशासन इस मुद्दे का समाधान निकालने में सफल होगा। प्रदेश में इस घटनाक्रम ने राजनीति को नई दिशा दे दी है। साथी आप इस पोस्ट को पूरा पड़े हम आपको शुरुआत से लगाकर अब तक की सारी सच्चाई आपके सामने रखेंगे जो की में स्ट्रीम मीडिया ने आपके सामने नहीं रखी है चलिए शुरुआत से बात करते हैं हम -

राजस्थान में नरेश मीणा की गिरफ़्तारी: एसडीएम को थप्पड़ मारने की घटना से देवली-उनियारा में तनाव

राजस्थान के देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव में एक बड़े विवाद ने तूल पकड़ा, जब गांव के लोगों ने उपखंड बदलने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार कर दिया। गांव के लोग सरकार से लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर नाराज थे, और उपचुनाव के दिन इस मुद्दे को लेकर धरने पर बैठ गए। इस धरने में निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा भी शामिल हुए थे। समरावता गांव के लोगों की एक मांग थी कि यहां पर हमारे जिले की जिला कलेक्टर साहिबा आए और हम लोगों को आश्वासन दे कि हमारे उपखंड मैं जो हमारी मांग है उसके आधार पर परिवर्तन कर दिया जाएगा तो हम धरना समाप्त कर देते हैं और शांतिपूर्वक तरीके से हम अपना वोटिंग करेंगे लेकिन वहां पर जिला कलेक्टर साहिब समय पर उपस्थित नहीं हुई इस समय SDM Amit Choudhary ने गांव के कुछ लोगों से जबरदस्ती Voting करवा दी यह हम अपनी तरफ से आरोप प्रत्यारोप नहीं लगा रहे हैं स्थानीय लोगों का कहना है और जैसा कि हमें सोशल मीडिया के से जानकारी मिली है


स्थानीय लोगों का आरोप है कि मतदान के दौरान एसडीएम अमित चौधरी ने गांव के तीन लोगों पर दबाव डालकर जबरदस्ती वोट डलवाए। उनका कहना है कि एसडीएम ने उन्हें सरकारी नौकरी से हटाने और नौकरी छीन लेने की धमकी दे डाली और एक आंगनबाड़ी की कार्यकर्ता और एक सरकारी शिक्षक और एक गाँव के किसी किसान का वोट जबरदस्ती दिलाया आरोपों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया और इसी बीच निर्दलीय प्रत्याशी Naresh Meena ने आवेश में आकर एसडीएम Amit Choudhary को थप्पड़ मार दिया, जिससे यह घटना राज्य में सुर्खियो में बन गई।


ग्रामीणों का पक्ष:

गांव के कुछ लोगों ने बयान दिया कि वहां के कुछ लोगों ने जैसा कि हमने पहले बताया था कि SDM के दबाव में वोटिंग की। वहीं, पूरे गांव ने इस घटना को अन्याय और प्रशासनिक दुरुपयोग करार देते हुए नरेश मीणा का समर्थन किया। साथ ही जिन्होंने वोटिंग की अब वो खुल कर सामने आए हैं जिनकी बात सुनना बहुत ही जरूरी हैं 


नरेश मीणा का धरना जारी: एसडीएम को थप्पड़ मारने के बावजूद संघर्ष जारी

राजस्थान के देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान, नरेश मीणा द्वारा एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारने के बाद भी उनका आंदोलन शांत नहीं हुआ। इस घटना के बाद भी नरेश मीणा समरावता गांव में ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे रहे। उनका मुख्य मांग थी कि कलेक्टर यहां आएं और गांव के लोगों को लिखित या मौखिक आश्वासन दें कि उनके मुद्दों को सुलझाया जाएगा।

जब तक मतदान शांतिपूर्वक तरीके से जारी था और पूरा हुआ, नरेश मीणा और उनके समर्थक अपनी मांग पर डटे रहे। वे यह चाहते थे कि प्रशासन उनके अधिकारों और समस्याओं को गंभीरता से समझे और उचित कार्रवाई करे।



नरेश मीणा के आंदोलन के बाद देवली-उनियारा में बढ़ता तनाव: पुलिस कार्रवाई और गांव में हिंसा

राजस्थान के देवली-उनियारा विधानसभा उपचुनाव के दौरान, एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारने के बाद नरेश मीणा ने समरावता गांव में धरने पर बैठने का निर्णय लिया। मतदान शांतिपूर्वक तरीके से संपन्न हो गया था, और सभी संबंधित मतदान सामग्री भी वहां से हटा ली गई थी। बावजूद इसके, नरेश मीणा और उनके समर्थक धरने पर डटे रहे। उनका मुख्य उद्देश्य था कि कलेक्टर साहब गांव में आकर लोगों को लिखित या मौखिक आश्वासन दें।

धरने के बाद, नरेश मीणा ने सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का विचार किया और खाने का भी इंतजाम किया। लेकिन जैसे ही उनकी गाड़ी गांव के बाहर पहुंची, पुलिस ने उसे रोक लिया। यह जानकारी नरेश मीणा के समर्थकों और गांववासियों के सोशल मीडिया पोस्ट से मिली।

इसके बाद, पुलिस प्रशासन ने गांव में कथित तौर पर तोड़फोड़ और आगजनी की। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने गांव के लोगों पर लाठियां बरसाईं। एक वायरल वीडियो में पुलिस अधिकारियों को पत्थर घरों में फेंकते हुए देखा गया, जिससे गांव में स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई, और इसने नरेश मीणा के आंदोलन को और भी उग्र बना दिया।

रात के समय, नरेश मीणा को पुलिस ने अपनी हिरासत में लिया था, लेकिन इसके बाद की घटनाओं की पुष्टि नहीं हो पाई है। हालांकि, जानकारी के मुताबिक कुछ हिंसा हुई थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि हिंसा का जिम्मेदार कौन था। वीडियो के आधार पर यह संभावना जताई जा रही है कि हिंसा पुलिस की ओर से हो सकती है। इस हिंसा के बाद, नरेश मीणा के समर्थकों ने उन्हें पुलिस से छुड़ा लिया और किसी सुरक्षित स्थान पर ले गए।

अगले दिन, नरेश मीणा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जहां उन्हें फिर से पुलिस ने उठाया। इसके बाद, उन्हें स्थानीय कोर्ट ने हिरासत में भेज दिया। यह घटनाक्रम पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया और नरेश मीणा की गिरफ्तारी ने और भी राजनीतिक और सामाजिक तनाव को जन्म दिया।


Naresh Meena की गिरफ्तारी के बाद प्रदेशभर में उफान, उपखंड और जिला कार्यालय पर रिहाई के लिए प्रदर्शन


नरेश मीणा की गिरफ्तारी के बाद, उनके समर्थकों में आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, और हजारों लोगों ने नरेश मीणा की रिहाई के लिए आवाज उठाई है। समर्थकों ने उपखंड और जिला कार्यालयों पर ज्ञापन सौंपने का सिलसिला शुरू कर दिया है, जिसमें उनकी जल्द रिहाई की मांग की जा रही है। इस दौरान समर्थकों ने नारेबाजी भी की और अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लिया।

नरेश मीणा की गिरफ्तारी के बाद उनकी रिहाई को लेकर प्रदेशभर में जनाक्रोश देखने को मिल रहा है, और यह मामला अब राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन चुका है।

नरेश मीणा की जमानत 25 नवंबर 2024 को खारिज हो गई, जिसके बाद से उनके समर्थकों में और ज्यादा गुस्सा और आक्रोश देखने को मिला। हालांकि विरोध प्रदर्शन शुरू से ही चल रहे थे देवली-उनीआरा विधानसभा उपचुनाव के दौरान एसडीएम अमित चौधरी को थप्पड़ मारने के आरोप में गिरफ्तार किए गए नरेश मीणा के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज किए गए थे। इस घटनाक्रम के बाद, नरेश मीणा के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत की और उनके लिए महापंचायत का आयोजन किया गया।


Naresh Meena कि रिहाई को लेकर महापंचायत का आयोजन और आंदोलन का विस्तार:

समर्थक लगातार नरेश की रिहाई के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं, और अब यह मामला राजनीतिक और सामाजिक मंच पर एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है।

उनकी जमानत खारिज होने के बाद से प्रदेशभर में विरोध की लहर बढ़ी है, नरेश मीणा की रिहाई के लिए महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे। समर्थक प्रदेशभर में आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं। महापंचायतों में बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे हैं, और अब तक इस मामले पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं आया है।


नई स्थिति में संघर्ष जारी है:

Naresh Meena की गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मची हुई है। उनकी रिहाई को लेकर प्रदेशभर में गुस्से की लहर है, और देखना यह होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है। क्या प्रशासन इस मुद्दे का हल निकालने में सफल होगा, या यह आंदोलन और भी तीव्र हो जाएगा? आगामी दिनों में इस घटनाक्रम का राजनीतिक असर साफ नजर आएगा।देखना यह है कि आगे चलकर यह आंदोलन किस दिशा में जाता है।


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